मूल्य एवं कथाएँ, भाग ६
बीरबल और बुद्धि का घड़ा
एक रोचक अकबर-बीरबल कथा
काम करने से पहले सोचने की एक चतुर कथा
लेखक: शाश्वत सनातन
एक दृष्टि में
- आयु
- ५–८ वर्ष
- पृष्ठ
- २८
- श्रृंखला
- मूल्य एवं कथाएँ, भाग ६
- भाषा
- हिन्दी
- प्रारूप
- पेपरबैक · किण्डल ई-पुस्तक · Google Play ई-पुस्तक
यह पुस्तक शीघ्र Amazon और Google Play पर आएगी।
इस पुस्तक के बारे में
बुद्धि को भला घड़े में कैसे भरें?
जब एक ईर्ष्यालु पड़ोसी राजा सम्राट अकबर को एक असम्भव माँग भेजता है, "मुझे एक घड़ा भर बुद्धि भेज दो, नहीं तो मानो कि मेरा राज्य अधिक बुद्धिमान है", पूरी राजसभा घबरा उठती है। पर चतुर मन्त्री बीरबल उतावली नहीं करते। वे मुस्कुराते हैं, कुछ सप्ताह माँगते हैं... और अपने उपवन चले जाते हैं। वहाँ वे जो उगाते हैं, वह उस मूर्खतापूर्ण माँग को उसी राजा पर कुशलता से लौटा देता है जिसने वह की थी।
एक प्रिय अकबर–बीरबल लोक-कथा का उज्ज्वल, रोचक, मुग़ल-मिनिएचर-प्रभावित पुनर्कथन, जो सबसे व्यावहारिक बुद्धि सिखाता है: काम करने से पहले रुको और सोचो। ऐतिहासिक बीरबल पर एक माता-पिता पृष्ठ, बातचीत के सूत्र, और एक शब्दावली सहित।
सनातन भूमि · गुरुकुल छाप से, भारत-मूल, हमारी पूरी कथा-परम्परा का उत्सव, कभी उपदेशात्मक नहीं। मूल्य एवं कथाएँ श्रृंखला से।
चित्र डिजिटल साधनों से, जिनमें कृत्रिम बुद्धि (AI) भी सम्मिलित है, बनाए गए और फिर सावधानी से चुने और सँवारे गए हैं।