सनातन भूमि Sanatan Bhumi
English
हाथ से बने चन्द्र-कला चित्र के पास रखा पीतल का पुराना यन्त्र, दोपहर की गुनगुनी धूप में।

पञ्चाङ्ग दिन के पाँच अङ्ग

वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण, साथ में सूर्योदय, चन्द्रोदय, राहुकाल और अभिजित् मुहूर्त। यह पृष्ठ आपके खोलते ही आज की तिथि के लिए गणना करता है।

आज का पञ्चाङ्ग

मंगलवार, 15 सितंबर 2026

नई दिल्ली के लिए, भारतीय मानक समय में।

पाँच अङ्ग

वार
मङ्गलवार
पक्ष
शुक्ल पक्ष
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 07:44 तक, तत्पश्चात् शुक्ल पञ्चमी 16 सितंबर 08:59 तक
नक्षत्र
स्वाती 15:21 तक, तत्पश्चात् विशाखा 16 सितंबर 17:23 तक
योग
ऐन्द्र 12:21 तक, तत्पश्चात् वैधृति 16 सितंबर 12:23 तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:44 तक, तत्पश्चात् बव 20:17 तक, तत्पश्चात् बालव 16 सितंबर 08:59 तक

सूर्य और चन्द्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:26
चन्द्रोदय
10:05
चन्द्रास्त
20:40
सूर्य राशि
सिंह
चन्द्र राशि (सूर्योदय पर)
तुला

शुभ और अशुभ काल

राहुकाल
15:21 – 16:54
यमगण्ड
09:11 – 10:44
गुलिक काल
12:16 – 13:49
अभिजित् मुहूर्त
11:52 – 12:41

मास, संवत् और पर्व

मास (पूर्णिमान्त)
भाद्रपद
मास (अमान्त)
भाद्रपद
विक्रम संवत्
2083
व्रत एवं पर्व
नहीं

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आने वाले दिन

दिनाङ्क तिथि (सूर्योदय पर) नक्षत्र व्रत एवं पर्व
मंगल, 15 सित॰ शुक्ल चतुर्थी स्वाती
बुध, 16 सित॰ शुक्ल पञ्चमी विशाखा
गुरु, 17 सित॰ शुक्ल षष्ठी अनुराधा कन्या संक्रान्ति
शुक्र, 18 सित॰ शुक्ल सप्तमी ज्येष्ठा
शनि, 19 सित॰ शुक्ल अष्टमी मूल
रवि, 20 सित॰ शुक्ल नवमी पूर्वाषाढ़ा
सोम, 21 सित॰ शुक्ल दशमी उत्तराषाढ़ा
मंगल, 22 सित॰ शुक्ल एकादशी उत्तराषाढ़ा एकादशी
बुध, 23 सित॰ शुक्ल द्वादशी श्रवण
गुरु, 24 सित॰ शुक्ल त्रयोदशी धनिष्ठा प्रदोष व्रत
शुक्र, 25 सित॰ शुक्ल चतुर्दशी शतभिषा
शनि, 26 सित॰ शुक्ल पूर्णिमा पूर्वा भाद्रपद पूर्णिमा
रवि, 27 सित॰ कृष्ण प्रतिपदा उत्तरा भाद्रपद
सोम, 28 सित॰ कृष्ण द्वितीया रेवती

पञ्चाङ्ग के पाँच अङ्ग

वार
सप्ताह का दिन। पञ्चाङ्ग का दिन आधी रात से नहीं, सूर्योदय से आरम्भ होता है और अगले सूर्योदय तक चलता है।
तिथि
चन्द्रमा सूर्य से जितना आगे निकलता है, उस अन्तर के प्रत्येक बारह अंश एक तिथि हैं। अमावस्या के पश्चात् शुक्ल पक्ष की पन्द्रह तिथियाँ आती हैं और पूर्णिमा के पश्चात् कृष्ण पक्ष की पन्द्रह। जो तिथि दो सूर्योदयों पर रहे, उसकी वृद्धि मानी जाती है; जो किसी भी सूर्योदय पर न पड़े, उसका क्षय।
नक्षत्र
राशिचक्र के सत्ताईस समान भाग, प्रत्येक तेरह अंश बीस कला का। चन्द्रमा जिस भाग में होता है, वही उस समय का नक्षत्र है।
योग
सूर्य और चन्द्रमा के निरयन भोगांशों का जोड़, सत्ताईस भागों में बँटा हुआ। विष्कम्भ से वैधृति तक सत्ताईस योग हैं।
करण
तिथि का आधा भाग। बव से विष्टि तक सात चर करण क्रम से आते रहते हैं; शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किंस्तुघ्न, ये चार स्थिर करण मास में एक-एक बार आते हैं। विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं।

गणना की विधि

यह पञ्चाङ्ग किसी छपी तालिका से उतारा नहीं जाता, प्रत्येक दिन के लिए गणित से निकाला जाता है। सूर्य और चन्द्रमा की स्पष्ट स्थिति खगोलीय गणना से ली जाती है और निरयन राशिचक्र लाहिड़ी (चित्रापक्ष) अयनांश से।

सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी छोर क्षितिज पर दिखता है; चन्द्रोदय में चन्द्रमा का मध्य भाग लिया गया है, जैसा प्रचलित पञ्चाङ्गों में होता है। समय नई दिल्ली (28.61° उत्तर, 77.21° पूर्व) के लिए हैं।

तिथि, नक्षत्र आदि के समाप्ति-क्षण पूरे भारत में एक ही होते हैं, केवल सूर्योदय के सापेक्ष उनका स्थान बदलता है। इसलिए किसी दूसरे नगर में सूर्योदय पर प्रचलित तिथि कभी-कभी भिन्न हो सकती है।

व्रत और पर्व यहाँ केवल तिथि के आधार पर दिए गए हैं। बड़े व्रतों के निर्णय में स्थानीय परम्परा और शास्त्रीय नियम भी देखे जाते हैं, इसलिए अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि कर लें।