पाँच अङ्ग
- वार
- गुरुवार
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 22:16 तक, तत्पश्चात् कृष्ण चतुर्दशी 9 अक्टूबर 21:36 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा फाल्गुनी 21:20 तक, तत्पश्चात् उत्तरा फाल्गुनी 9 अक्टूबर 21:20 तक
- योग
- शुक्ल 9 अक्टूबर 00:59 तक, तत्पश्चात् ब्रह्म 9 अक्टूबर 23:21 तक
- करण
- गर 10:44 तक, तत्पश्चात् वणिज 22:16 तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा) 9 अक्टूबर 09:53 तक
सूर्य और चन्द्रमा
- सूर्योदय
- 06:18
- सूर्यास्त
- 17:59
- चन्द्रोदय
- 9 अक्टूबर 04:54
- चन्द्रास्त
- 16:29
- सूर्य राशि
- कन्या
- चन्द्र राशि (सूर्योदय पर)
- सिंह
शुभ और अशुभ काल
- राहुकाल
- 13:36 – 15:04
- यमगण्ड
- 06:18 – 07:46
- गुलिक काल
- 09:13 – 10:41
- अभिजित् मुहूर्त
- 11:45 – 12:32
मास, संवत् और पर्व
- मास (पूर्णिमान्त)
- आश्विन
- मास (अमान्त)
- भाद्रपद
- विक्रम संवत्
- 2083
- व्रत एवं पर्व
- प्रदोष व्रत
पञ्चाङ्ग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। प्रत्येक अङ्ग सूर्योदय पर प्रचलित मान से आरम्भ होता है।
व्रत और पर्व यहाँ केवल तिथि के आधार पर दिए गए हैं। बड़े व्रतों के निर्णय में स्थानीय परम्परा और शास्त्रीय नियम भी देखे जाते हैं, इसलिए अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि कर लें।