पाँच अङ्ग
- वार
- रविवार
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 23 नवंबर 02:37 तक, तत्पश्चात् शुक्ल चतुर्दशी 23 नवंबर 23:42 तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 23 नवंबर 04:16 तक, तत्पश्चात् भरणी 24 नवंबर 02:02 तक
- योग
- व्यतीपात 23:30 तक, तत्पश्चात् वरीयान् 23 नवंबर 19:59 तक
- करण
- कौलव 15:52 तक, तत्पश्चात् तैतिल 23 नवंबर 02:37 तक, तत्पश्चात् गर 23 नवंबर 13:13 तक
सूर्य और चन्द्रमा
- सूर्योदय
- 06:49
- सूर्यास्त
- 17:25
- चन्द्रोदय
- 15:30
- चन्द्रास्त
- 23 नवंबर 05:07
- सूर्य राशि
- वृश्चिक
- चन्द्र राशि (सूर्योदय पर)
- मेष
शुभ और अशुभ काल
- राहुकाल
- 16:06 – 17:25
- यमगण्ड
- 12:07 – 13:27
- गुलिक काल
- 14:46 – 16:06
- अभिजित् मुहूर्त
- 11:46 – 12:28
मास, संवत् और पर्व
- मास (पूर्णिमान्त)
- कार्तिक
- मास (अमान्त)
- कार्तिक
- विक्रम संवत्
- 2083
- व्रत एवं पर्व
- प्रदोष व्रत
पञ्चाङ्ग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। प्रत्येक अङ्ग सूर्योदय पर प्रचलित मान से आरम्भ होता है।
व्रत और पर्व यहाँ केवल तिथि के आधार पर दिए गए हैं। बड़े व्रतों के निर्णय में स्थानीय परम्परा और शास्त्रीय नियम भी देखे जाते हैं, इसलिए अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि कर लें।